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Crime News Hindi: श्रद्धा केस: 4 साल, 3 मौतें… लेकिन इंसाफ अब भी अधूरा! क्या हमारी न्याय व्यवस्था फेल हो चुकी है?

by PP Singh
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Crime News Hindi: श्रद्धा केस: 4 साल, 3 मौतें… लेकिन इंसाफ अब भी अधूरा! क्या हमारी न्याय व्यवस्था फेल हो चुकी है?

Crime News Hindi: भारत में हर पीड़ित इंसान…इंसाफ की आस लगाए कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है। इस उम्मीद में कि उसे एक ना एक दिन न्याय जरूर मिलेगा। देर समेर ही सही उसे न्याय भी मिलता है। लेकिन सवाल ये है कि क्या वक्त रहते न्याय मिल पाता है। क्या उस इंतजार की भरपाई हो पाती है। क्या उस वक्त की मेंटल और फाइनेंशियल भरपाई हो पाती है। शायद आपका भी जवाब ना ही होगा। या फिर कहेंगे कि कुछ केसेज में शायद ऐसा हुआ होगा…लेकिन श्रद्धा के केस में 4 साल बीत जाने के बाद भी ऐसा नहीं हुआ।

श्रद्धा मर्डर केस-

18 मई 2022.. ये वो तारीख है जिस दिन श्रद्धा का मर्डर हुआ। उसके जिस्म के 35 टुकड़े कर दिए गए..दिल्ली के अलग-अलग कोनों में फेंक दिए गए। आफताब को पुलिस ने अरेस्ट किया। उसकी बताई लोकेशन से शव के टुकड़े भी बरामद किए। मामला इतना संगीन और गमगीन था कि पूरे देश में आरोपी आफताब को फांसी की सजा देने की मांग की। दिन रात एक करके पुलिस ने सबूत जुटाए और साल के आखिरी महीने तक सारे सबूत भी इकट्ठे कर लिए गए। आरोपी का कबूलनामा भी उसमें शामिल था। परिवार को लगा कि अब शायद श्रद्धा को इंसाफ मिल जाएगा। लेकिन साल 2022 बीत गया, फिर 2023 भी चला गया, 2024 भी खत्म हो गया और अब साल 2025 भी शुरू हो गया। इन चार सालों में श्रद्धा और उसके परिवार को अबतक न्याय नहीं मिल पाया। इन चार सालों में श्रद्धा के परिवार ने तीन लोगों को खो दिया। पहले बेटी श्रद्धा, फिर उसकी मां और अब पिता। श्रद्धा की मौत से सदमे में मां चल बसी। फिर एक बाप अपनी बेटी के इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ता रहा। इस दर्द और सदमे के साथ वो कोर्ट के चक्कर लगाता रहा। चार साल तक उस पिता ने ना जाने कितनी दफा अपनी बेटी के साथ हुए गुनाह को याद किया होगा। महसूस किया होगा। उस दर्द को जिया होगा। श्रद्धा के पिता को उम्मीद थी एक ना दिन उन्हे और उनकी बेटी को इंसाफ मिलेगा। इस इंतजार में 4 साल बीत गए। इन 4 सालों में एक पिता अपनी बेटी का न्याय नहीं दिला सका। इन 4 सालों में एक पिता अपनी बेटी का अंतिम संस्कार नहीं कर सका। इन 4 सालों में एक पिता मुस्करा नहीं सका…न्याय की उम्मीद में आखिरकार उस पिता की हिम्मत टूट गई। हार्ट अटैक से पिता की भी मौत हो गई।

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अब श्रद्धा वालकर के परिवार में एक बूढ़ी दादी और एक बेटा बचा है। जो इस केस को आगे बढ़ाने की बात कर रहा है। उन्हे भी उम्मीद है कि एक ना एक दिन वो इंसाफ की लड़ाई जीत जाएंगे। एक ना एक दिन श्रद्धा के कातिल को सजा होगी। एक ना एक दिन श्रद्धा का भी अंतिम संस्कार कर सकेंगे। एक ना एक दिन श्रद्धा के परिवार में खुशियां लौट आएगी। लेकिन सोचने वाली बात ये है कि इन चार सालों में इस परिवार ने आखिर क्या हासिल किया। परिवार ने अपने तीन लोगों को खो दिया। साथ ही इंसाफ के इंतजार में उस उम्मीद को भी.. किसी इंसान या परिवार की जिंदगी के 4 साल बहुत मायने रखते। लेकिन हमारे सिस्टम को देखते हुए…ये चार साल भी नाकाफी है।

ब्यूरो रिपोर्ट, लोकल पत्रकार।

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